सूरह Al-Qasas, आयत 25

28:25

فَجَآءَتۡهُ إِحۡدَىٰهُمَا تَمۡشِي عَلَى ٱسۡتِحۡيَآءٖ قَالَتۡ إِنَّ أَبِي يَدۡعُوكَ لِيَجۡزِيَكَ أَجۡرَ مَا سَقَيۡتَ لَنَاۚ فَلَمَّا جَآءَهُۥ وَقَصَّ عَلَيۡهِ ٱلۡقَصَصَ قَالَ لَا تَخَفۡۖ نَجَوۡتَ مِنَ ٱلۡقَوۡمِ ٱلظَّٰلِمِينَ ٢٥

फिर दोनों में से एक बहुत लज्जा के साथ चलती हुई उसके पास आई। उसने कहा : निःसंदेह मेरे पिता7 आपको बुला रहे हैं। ताकि आपको उसका बदला दें जो आपने हमारे लिए (जानवरों को) पानी पिलाया है। तो जब वह (मूसा) उसके पास आया और उसे पूरी स्थिति बताई, तो उसने कहा : डरो मत, तुम उन ज़ालिम लोगों8 से बच निकले हो।

फ़ुटनोट

7 व्याख्याकारों ने लिखा है कि वह आदरणीय शुऐब (अलैहिस्सलाम) थे जो मदयन के नबी थे। (देखिए : इब्ने कसीर)

8 अर्थात फ़िरऔनियों से।

तफ़सीर

जब वे दोनों घर गईं, तो अपने पिता को उनके बारे में बताया। उनके पिता ने उन दोनों में से एक को उन्हें बुलाने के लिए भेजा। वह उनके पास लजाते हुए आई और बोली : मेरे पिता आपको बुला रहे हैं, ताकि वह आपको हमारे लिए पानी पिलाने का बदला दें। जब मूसा उन दोनों के पिता के पास आए और उन्हें अपना समाचार सुनाया, तो उन्होंने उन्हें आश्वासन देते हुए कहा : भय न करो। तुम अत्याचारी लोगों फ़िरऔन तथा उसके प्रमुखों से नजात पा चुके। क्योंकि मदयन पर उनका अधिकार नहीं है। इसलिए वे तुम्हें कोई हानि नहीं पहुँचा सकते।