सूरह Al-Mujadilah, आयत 10

58:10

إِنَّمَا ٱلنَّجۡوَىٰ مِنَ ٱلشَّيۡطَٰنِ لِيَحۡزُنَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَلَيۡسَ بِضَآرِّهِمۡ شَيۡـًٔا إِلَّا بِإِذۡنِ ٱللَّهِۚ وَعَلَى ٱللَّهِ فَلۡيَتَوَكَّلِ ٱلۡمُؤۡمِنُونَ ١٠

यह कानाफूसी तो मात्र शैतान की ओर से है, ताकि वह ईमान वालों को दुखी6 करे, हालाँकि वह अल्लाह की अनुमति के बिना उन्हें कुछ भी नुकसान नहीं पहुँचा सकता। और ईमान वालों को अल्लाह ही पर भरोसा रखना चाहिए।

फ़ुटनोट

6 ह़दीस में है कि जब तुम तीन एक साथ रहो, तो दो आपस में कानाफूसी न करें। क्योंकि इससे तीसरे को दुःख होता है। (सह़ीह़ बुख़ारी : 6290, सह़ीह़ मुस्लिम : 2184)

तफ़सीर

निश्चित रूप से - गुनाह, अत्याचार और रसूल की अवज्ञा पर आधारित - कानाफूसी शैतान की ओर से अपने दोस्तों के लिए उसे शोभित करके प्रस्तुत करने और फुसफुसाने के कारण है। ताकि वह ईमान वालों को इस बात से शोकाकुल कर दे कि उनके विरुद्ध चाल चली जा रही है। हालाँकि शैतान और उसका यह सुशोभीकरण, अल्लाह की मर्ज़ी और इच्छा के बिना ईमान वालों को कुछ भी नुक़सान नहीं पहुँचा सकता। और ईमान वालों को अपने सभी मामलों में अल्लाह ही पर भरोसा करना चाहिए।