حَتَّىٰٓ إِذَا بَلَغَ مَغۡرِبَ ٱلشَّمۡسِ وَجَدَهَا تَغۡرُبُ فِي عَيۡنٍ حَمِئَةٖ وَوَجَدَ عِندَهَا قَوۡمٗاۖ قُلۡنَا يَٰذَا ٱلۡقَرۡنَيۡنِ إِمَّآ أَن تُعَذِّبَ وَإِمَّآ أَن تَتَّخِذَ فِيهِمۡ حُسۡنٗا ٨٦
यहाँ तक कि जब वह सूर्यास्त के स्थान30 तक पहुँचा, तो उसे पाया कि वह एक काले कीचड़ वाले जलस्रोत में डूब रहा है और उसके पास एक जाति को पाया। हमने कहा : ऐ ज़ुल-क़रनैन! या तो तू उन्हें यातना दे और या तो तू उनके साथ अच्छा व्यवहार कर।
फ़ुटनोट
30 अर्थात पश्चिम की अंतिम सीमा तक।
तफ़सीर
तथा वह पृथ्वी पर चलता रहा, यहाँ तक कि जब सूर्यास्त की दिशा से (आँख की दृष्टि में) पृथ्वी के अंत तक पहुँच गया, तो उसने सूर्य को देखा, मानो कि वह एक काले कीचड़ वाले गर्म जलस्रोत में ड़ूब रहा है। तथा उसने सूर्यास्त के स्थान के पास अल्लाह पर विश्वास न रखने वाली एक जाति को पाया। हमने उसे एक विकल्प के रूप में कहा : ऐ ज़ुल-क़रनैन! या तो तुम इन लोगों को क़त्ल करके या किसी अन्य चीज़ के साथ यातना दो, और या तो तुम उनके साथ अच्छा व्यवहार करो।