وَإِذَا قَرَأۡتَ ٱلۡقُرۡءَانَ جَعَلۡنَا بَيۡنَكَ وَبَيۡنَ ٱلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ بِٱلۡأٓخِرَةِ حِجَابٗا مَّسۡتُورٗا ٤٥
और जब आप क़ुरआन पढ़ते हैं, तो हम आपके बीच और उनके बीच, जो आख़िरत (परलोक) पर ईमान नहीं रखते, एक छिपाने वाले पर्दे की आड़26 बना देते हैं।
फ़ुटनोट
26 अर्थात परलोक पर ईमान न लाने का यही स्वभाविक परिणाम है कि क़ुरआन को समझने की योग्यता खो जाती है।
तफ़सीर
जब (ऐ रसूल) आप क़ुरआन पढ़ते हैं और वे उसकी डराने-धमकाने वाली बातों और उपदेशों को सुनते हैं, तो हम आपके और क़ियामत के दिन पर ईमान न लाने वालों के बीच एक पर्दा डाल देते हैं, जो उन्हें उनके मुँह फेरने की सज़ा के तौर पर क़ुरआन समझने से रोक देता है।