تُسَبِّحُ لَهُ ٱلسَّمَٰوَٰتُ ٱلسَّبۡعُ وَٱلۡأَرۡضُ وَمَن فِيهِنَّۚ وَإِن مِّن شَيۡءٍ إِلَّا يُسَبِّحُ بِحَمۡدِهِۦ وَلَٰكِن لَّا تَفۡقَهُونَ تَسۡبِيحَهُمۡۚ إِنَّهُۥ كَانَ حَلِيمًا غَفُورٗا ٤٤
सातों आकाश तथा धरती और उनके अंदर मौजूद सभी चीज़ें उसकी पवित्रता का वर्णन करती हैं। और कोई चीज़ ऐसी नहीं है जो उसकी प्रशंसा के साथ उसकी पवित्रता का गान न करती हो। लेकिन तुम उनकी तस्बीह (जप) को नहीं समझते। निःसंदेह वह अत्यंत सहनशील, बहुत क्षमा करने वाला है।
तफ़सीर
आकाश अल्लाह की पवित्रता का गान करते हैं, धरती अल्लाह की पवित्रता का गान करती है, तथा आकाशों और धरती के सभी प्राणी अल्लाह की पवित्रता का गान करते हैं, बल्कि कोई भी चीज़ ऐसी नहीं है जो उसकी प्रशंसा के साथ उसकी पवित्रता का गान न करती हो। लेकिन तुम यह नहीं समझते कि वे कैसे पवित्रता का गान करते हैं। क्योंकि तुम केवल उन्हीं की तस्बीह (पवित्रता-गान) को समझते हो, जो तुम्हारी भाषा में पवित्रता का गान करते हैं। निःसंदेह अल्लाह अत्यंत सहनशील है, वह जल्दी सज़ा नहीं देता, तौबा करने वालों को बहुत क्षमा करने वाला है।