सूरह Al-Imran, आयत 66

3:66

هَٰٓأَنتُمۡ هَٰٓؤُلَآءِ حَٰجَجۡتُمۡ فِيمَا لَكُم بِهِۦ عِلۡمٞ فَلِمَ تُحَآجُّونَ فِيمَا لَيۡسَ لَكُم بِهِۦ عِلۡمٞۚ وَٱللَّهُ يَعۡلَمُ وَأَنتُمۡ لَا تَعۡلَمُونَ ٦٦

देखो, तुम वे लोग हो कि तुमने उस विषय में वाद-विवाद किया, जिसके बारे में तुम्हें कुछ ज्ञान31 था, तो उस विषय में क्यों वाद-विवाद करते हो, जिसका तुम्हें कुछ ज्ञान32 नहीं? तथा अल्लाह जानता है और तुम नहीं जानते।

फ़ुटनोट

31 अर्थात अपने धर्म के विषय में।

32 अर्थात इबराहीम अलैहिस्सलाम के धर्म के बारे में।

तफ़सीर

ऐ किताब वालो! तुमने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से अपने धर्म के मामले में तथा अपने ऊपर उतरी हुई पुस्तक के बारे में बहस किया, जिसका तुम्हें ज्ञान था, परंतु तुम इबराहीम अलैहिस्सलाम और उनके धर्म के संबंध में क्यों बहस करते हो, जिसका तुम्हें कोई ज्ञान नहीं है, जो न तो तुम्हारी पुस्तकों में है, और न तुम्हारे नबियों द्वारा लाया गया है?! वास्तव में, अल्लाह ही मामलों के तथ्यों और उनकी आंतरिक बातों को जानता है और तुम नहीं जानते।