सूरह Al-Hashr, आयत 9

59:9

وَٱلَّذِينَ تَبَوَّءُو ٱلدَّارَ وَٱلۡإِيمَٰنَ مِن قَبۡلِهِمۡ يُحِبُّونَ مَنۡ هَاجَرَ إِلَيۡهِمۡ وَلَا يَجِدُونَ فِي صُدُورِهِمۡ حَاجَةٗ مِّمَّآ أُوتُواْ وَيُؤۡثِرُونَ عَلَىٰٓ أَنفُسِهِمۡ وَلَوۡ كَانَ بِهِمۡ خَصَاصَةٞۚ وَمَن يُوقَ شُحَّ نَفۡسِهِۦ فَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡمُفۡلِحُونَ ٩

तथा (उनके लिए) जिन्होंने6 इनसे पहले इस घर (अर्थात् मदीना) में और ईमान में जगह बना ली है। वे अपनी ओर हिजरत करके आने वालों से प्रेम करते हैं। और वे अपने दिलों में उस चीज़ के प्रति कोई चाहत (हसद) नहीं पाते, जो मुहाजिरों को दी जाए और (उन्हें) अपने आप पर प्रधानता देते हैं, चाहे स्वयं ज़रूरतमंद7 हों। और जो अपने मन की लालच (कृपणता) से बचा लिया गया, तो वही लोग सफल होने वाले हैं।

फ़ुटनोट

6 इससे अभिप्राय मदीना के निवासी अन्सार हैं। जो मुहाजिरीन के मदीना में आने से पहले ईमान लाए थे। इसका यह अर्थ नहीं है कि वे मुहाजिरीन से पहले ईमान लाए थे।

7 ह़दीस में है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास एक अतिथि आया और कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! मैं भूखा हूँ। आपने अपनी पत्नियों के पास भेजा, तो वहाँ कुछ नहीं था। एक अन्सारी उसे घर ले गए। घर पहुँचे तो पत्नी ने कहा : घर में केवल बच्चों का खाना है। उन्होंने परस्पर परामर्श किया कि बच्चों को बहलाकर सुला दिया जाए। तथा पत्नी से कहा कि जब अतिथि खाने लगे, तो तुम दीप बुझा देना। उसने ऐसा ही किया। सब भूखे सो गए और अतिथि को खिला दिया। जब वह अन्सारी भोर में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास पहुँचे तो आपने कहा : अमुक पुरुष (अबू तल्ह़ा) और अमुक स्त्री (उम्मे सुलैम) से अल्लाह प्रसन्न हो गया। और उसने यह आयत उतारी है। (सह़ीह़ बुख़ारी : 4889)

तफ़सीर

और वे अंसार, जो मुहाजिरों से पहले से मदीना में निवास करते थे तथा उन्होंने अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान को चुन लिया था, वे उन लोगों से प्रेम करते हैं, जो मक्का से हिजरत करके उनके यहाँ आए हैं। तथा अपने दिलों में अल्लाह के रास्ते में हिजरत करने वाले लोगों के बारे में कोई क्रोध तथा ईर्ष्या नहीं पाते, जब मुहाजिरों को बिना युद्ध के प्राप्त होने वाले धन में से कुछ दिया जाता है और उन्हें नहीं दिया जाता। और वे सांसारिक फायदों के मामले में, मुहाजिरों को खुद से आगे रखते हैं, यद्यपि खुद ग़रीब और ज़रूरतमंद हों। और जिसके दिल को अल्लाह धन की लालच से बचा ले, और वह उसे अल्लाह की राह में खर्च करने लगे, तो ऐसे ही लोग हैं जो अपनी आकांक्षाओं की प्राप्ति और जिस चीज़ से डरते हैं उससे मुक्ति में सफल होने वाले हैं।