सूरह Al-Hashr, आयत 10

59:10

وَٱلَّذِينَ جَآءُو مِنۢ بَعۡدِهِمۡ يَقُولُونَ رَبَّنَا ٱغۡفِرۡ لَنَا وَلِإِخۡوَٰنِنَا ٱلَّذِينَ سَبَقُونَا بِٱلۡإِيمَٰنِ وَلَا تَجۡعَلۡ فِي قُلُوبِنَا غِلّٗا لِّلَّذِينَ ءَامَنُواْ رَبَّنَآ إِنَّكَ رَءُوفٞ رَّحِيمٌ ١٠

और (उनके लिए) जो उनके पश्चात् आए, वे कहते हैं : ऐ हमारे पालनहार! हमें और हमारे उन भाइयों को क्षमा कर दे, जो हमसे पहले ईमान लाए और हमारे दिलों में उन लोगों के लिए कोई द्वेष न रख, जो ईमान लाए। ऐ हमारे पालनहार! तू अति करुणामय, अत्यंत दयावान् है।

तफ़सीर

और जो इन लोगों के बाद आए और क़ियामत के दिन तक भलाई के साथ उनका अनुसरण किया, वे कहते हैं : ऐ हमारे पालनहार! हमें क्षमा कर दे और हमारे उन इस्लामी भाइयों को भी क्षमा कर दे, जो हमसे पहले अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए हैं। तथा हमारे दिलों में किसी मोमिन के प्रति घृणा तथा द्वेष न रख। ऐ हामारे पालनहार! निश्चय तू अपने बंदों के प्रति बहुत स्नेहक, उनपर अत्यंत दयालु है।