يَوۡمَ يَرَوۡنَ ٱلۡمَلَٰٓئِكَةَ لَا بُشۡرَىٰ يَوۡمَئِذٖ لِّلۡمُجۡرِمِينَ وَيَقُولُونَ حِجۡرٗا مَّحۡجُورٗا ٢٢
जिस दिन13 वे फ़रिश्तों को देखेंगे, उस दिन अपराधियों के लिए कोई शुभ सूचना नहीं होगी और वे कहेंगे (काश! हमारे और उनके बीच) एक मज़बूत ओट होती।
फ़ुटनोट
13 अर्थात मरने के समय ( देखिए : सूरतुल-अनफ़ाल : 13), अथवा प्रलय के दिन।
तफ़सीर
जिस दिन काफ़िर लोग फ़रिश्तों को देखेंगे अपनी मौत के समय, क़ब्र की ज़िंदगी में, दोबारा जीवित किए जाते समय तथा उस समय जब वे हिसाब-किताब के लिए धकेलकर ले जाए जाएँगे और जब वे जहन्नम में डाले जाएँगे- तो इन सभी स्थितियों में उनके लिए कोई अच्छी खबर नहीं होगी। जबकि ईमान वालों का मामला इसके विपरीत होगा। तथा फ़रिश्ते उन अपराधियों से कहेंगे : अल्लाह की ओर से तुम्हें कोई खुशख़बरी मिलने वाली नहीं है।