सूरह Al-Baqarah, आयत 37

2:37

فَتَلَقَّىٰٓ ءَادَمُ مِن رَّبِّهِۦ كَلِمَٰتٖ فَتَابَ عَلَيۡهِۚ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلتَّوَّابُ ٱلرَّحِيمُ ٣٧

फिर आदम ने अपने पालनहार से कुछ शब्द सीख लिए, तो उसने उसकी तौबा क़बूल कर ली। निश्चय वही है जो बहुत तौबा क़बूल करने वाला, अत्यंत दयावान्18 है।

फ़ुटनोट

18 आयत का भावार्थ यह है कि आदम ने कुछ शब्द सीखे और उनके द्वारा क्षमा याचना की, तो अल्लाह ने उसे क्षमा कर दिया। आदम के उन शब्दों की व्याख्या भाष्यकारों ने इन शब्दों से की है : "आदम तथा ह़व्वा दोनों ने कहा : हे हमारे पालनहार! हमने अपने प्राणों पर अत्याचार कर लिया और यदि तूने हमें क्षमा और हम पर दया नहीं की, तो हम क्षतिग्रस्तों में हो जाएँगे।" (सूरतुल आराफ, आयत :23)

तफ़सीर

फिर आदम अलैहिस्सलाम ने वे शब्द सीख लिए, जो अल्लाह ने उनके दिल में डाल दिए थे और उनके साथ उन्हें दुआ करने के लिए प्रेरित किया था। ये वही शब्द हैं, जिनका उल्लेख अल्लाह के इस कथन में है : (الأعراف: 23)﴾قَالَا رَبَّنَا ظَلَمْنَا أَنفُسَنَا وَإِن لَّمْ تَغْفِرْ لَنَا وَتَرْحَمْنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ الْخَاسِرِينَ﴿ ''उन दोनों ने कहा : ऐ हमारे पालनहार! हमने अपनी जानों पर अत्याचार किया है। और यदि तूने हमें क्षमा न किया और हमपर दया न की, तो निश्चय हम अवश्य नुक़सान उठाने वालों में से हो जाएँगे।'' (सूरतुल आराफ़ : 23) चुनाँचे अल्लाह ने उनकी तौबा क़बूल कर ली और उन्हें क्षमा कर दिया। क्योंकि वह महिमावान् अपने बंदों की तौबा बहुत ज़्यादा क़बूल करने वाला और उनपर दया करने वाला है।