لِلۡفُقَرَآءِ ٱلَّذِينَ أُحۡصِرُواْ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ لَا يَسۡتَطِيعُونَ ضَرۡبٗا فِي ٱلۡأَرۡضِ يَحۡسَبُهُمُ ٱلۡجَاهِلُ أَغۡنِيَآءَ مِنَ ٱلتَّعَفُّفِ تَعۡرِفُهُم بِسِيمَٰهُمۡ لَا يَسۡـَٔلُونَ ٱلنَّاسَ إِلۡحَافٗاۗ وَمَا تُنفِقُواْ مِنۡ خَيۡرٖ فَإِنَّ ٱللَّهَ بِهِۦ عَلِيمٌ ٢٧٣
(यह दान) उन निर्धनों के लिए है, जो अल्लाह के मार्ग में रोके गए हैं, धरती में यात्रा नहीं कर सकते182, अनजान उन्हें किसी के सामने हाथ फैलाने से बचने के कारण धनवान् समझता है, तुम उन्हें उनके लक्षणों से पहचान लोगे, वे लोगों के पीछे पड़कर नहीं माँगते। तथा तुम जो भी धन ख़र्च करोगे, तो निश्चय अल्लाह उसे भली-भाँति जानने वाला है।
फ़ुटनोट
182 इससे सांकेतिक वे मुहाजिर हैं जो मक्का से मदीना हिज्रत कर गए। जिसके कारण उनका सारा सामान मक्का में छूट गया और अब उनके पास कुछ भी नहीं बचा। परंतु वे लोगों के सामने हाथ फैलाकर भीख नहीं माँगते।
तफ़सीर
यह दान उन ग़रीबों को दो, जिन्हें अल्लाह के मार्ग में जिहाद ने आजीविका की तलाश में यात्रा करने से रोक दिया है। उनकी स्थिति से अनभिज्ञ व्यक्ति उन्हें उनके माँगने से बचने के कारण धनवान् समझता है। हालाँकि जो व्यक्ति उनसे परिचित है, वह उन्हें उनके लक्षणों से पहचानता है, क्योंकि उनके शरीर और कपड़ों पर आवश्यकता स्पष्ट दिखाई देती है। उनकी पहचान यह भी है कि वे अन्य ग़रीब लोगों की तरह नहीं हैं, जो लोगों से माँगते हुए उनके पीछे पड़ जाते हैं। तथा तुम अपने धन इत्यादि में से जो कुछ भी ख़र्च करोगे, तो निश्चय अल्लाह उसे भली-भाँति जानता है और वह तुम्हें उसका बहुत बड़ा बदला देगा।