सूरह Al-Baqarah, आयत 143

2:143

وَكَذَٰلِكَ جَعَلۡنَٰكُمۡ أُمَّةٗ وَسَطٗا لِّتَكُونُواْ شُهَدَآءَ عَلَى ٱلنَّاسِ وَيَكُونَ ٱلرَّسُولُ عَلَيۡكُمۡ شَهِيدٗاۗ وَمَا جَعَلۡنَا ٱلۡقِبۡلَةَ ٱلَّتِي كُنتَ عَلَيۡهَآ إِلَّا لِنَعۡلَمَ مَن يَتَّبِعُ ٱلرَّسُولَ مِمَّن يَنقَلِبُ عَلَىٰ عَقِبَيۡهِۚ وَإِن كَانَتۡ لَكَبِيرَةً إِلَّا عَلَى ٱلَّذِينَ هَدَى ٱللَّهُۗ وَمَا كَانَ ٱللَّهُ لِيُضِيعَ إِيمَٰنَكُمۡۚ إِنَّ ٱللَّهَ بِٱلنَّاسِ لَرَءُوفٞ رَّحِيمٞ ١٤٣

और इसी प्रकार हमने तुम्हें सबसे बेहतर उम्मत (समुदाय) बनाया; ताकि तुम लोगों पर गवाही देने72 वाले बनो और रसूल तुमपर गवाही देने वाला बने। और हमने वह क़िबला जिसपर तुम थे, इसलिए निर्धारित किया था, ताकि हम जान लें कि कौन (इस) रसूल का अनुसरण करता है, उससे (अलग करके) जो अपनी ऐड़ियों पर फिर जाता है। और निःसंदेह यह बात निश्चय बहुत बड़ी थी, परंतु उन लोगों पर (नहीं) जिन्हें अल्लाह ने हिदायत दी और अल्लाह कभी ऐसा नहीं कि तुम्हारा ईमान (अर्थात् क़िबला बदलने से पहले पढ़ी गई नमाज़ों) को व्यर्थ कर दे।73 निःसंदेह अल्लाह लोगों पर अत्यंत करुणा करने वाला, अत्यंत दयावान् है।

फ़ुटनोट

72 गवाही देने का अर्थ जैसा कि ह़दीस में आया है यह है कि प्रलय के दिन नूह़ अलैहिस्सलाम को बुलाया जाएगा और उनसे प्रश्न किया जायेगा कि क्या तुमने अपनी जाति को संदेश पहुँचाया? वह कहेंगे : हाँ। फिर उनकी जाति से प्रश्न किया जाएगा, तो वे कहेंगे कि हमारे पास सावधान करने के लिए कोई नहीं आया। तो अल्लाह तआला नूह़ अलैहिस्सलाम से कहेगा कि तुम्हारा गवाह कौन है? वह कहेंगे : मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और उनकी उम्मत। फिर आपकी उम्मत गवाही देगी कि नूह़ ने अल्लाह का संदेश पहुँचाया है। और आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम तुमपर अर्थात मुसलमानों पर गवाह होंगे। (सह़ीह़ बुख़ारी : 4486)

73 अर्थात उसका फल प्रदान करेगा।

तफ़सीर

जिस तरह हमने तुम्हारे लिए वह क़िबला निर्धारित किया है, जिसे हमने तुम्हारे लिए पसंद किया है; वैसे ही हमने तुम्हें सबसे बेहतर, न्यायपूर्ण उम्मत (समुदाय) बनाया, जो अक़ायद, इबादात और मामलात में सभी उम्मतों (समुदायों) के बीच मध्यम है; ताकि तुम क़ियामत के दिन अल्लाह के सभी रसूलों के लिए गवाही देने वाले बन जाओ कि उन्होंने अपनी उम्मतों को वह संदेश पहुँचा दिया था जिसे पहुँचाने का अल्लाह ने उन्हे आदेश दिया था, तथा रसूल मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम तुमपर यह गवाही देने वाले हो जाएँ कि उन्होंने तुम्हें अल्लाह का धर्म पहुँचा दिया। तथा हमने उस क़िबले को जिसकी ओर आप रुख़ करते थे अर्थात् बैतुल-मक़दिस को इसलिए बदल दिया, ताकि हम - इस तरह प्रत्यक्ष रुप से जिसपर बदला निष्कर्षित होता है - जान लें कि कौन अल्लाह के निर्धारित किए हुए नियम से संतुष्ट होता है और उसके सामने अपना सिर झुकाते हुए रसूल का अनुसरण करता है, तथा कौन अपने धर्म से फिर जाता है और अपनी इच्छाओं का पालन करता है। इसलिए वह अल्लाह के बनाए हुए नियम के आगे सिर नहीं झुकाता। वास्तव में, पहले क़िबले को बदलने की बात बहुत बड़ी थी, सिवाय उन लोगों के लिए जिन्हें अल्लाह ने उसपर तथा इस बात पर विश्वास करने की तौफ़ीक़ दी कि अल्लाह अपने बंदों के लिए जो नियम बनाता है, वह व्यापक हिकमतों की वजह से बनाता है। तथा अल्लाह ऐसा नहीं कि तुम्हारा ईमान बर्बाद कर दे, जिसमें तुम्हारी वे नमाज़ें भी शामिल हैं, जो तुमने क़िबला बदलने से पहले पढ़ी थीं। निःसंदेह अल्लाह लोगों पर बहुत करुणा करने वाला, अत्यंत दयावान् है। इसलिए वह उन्हें कष्ट में नहीं डालता है, और उनके कर्मों का प्रतिफल व्यर्थ नहीं करता है।