सूरह Al-A'raf, आयत 198

7:198

وَإِن تَدۡعُوهُمۡ إِلَى ٱلۡهُدَىٰ لَا يَسۡمَعُواْۖ وَتَرَىٰهُمۡ يَنظُرُونَ إِلَيۡكَ وَهُمۡ لَا يُبۡصِرُونَ ١٩٨

और यदि तुम उन्हें सीधी राह की ओर बुलाओ, तो वे नहीं सुनेंगे और (ऐ नबी!) आप उन्हें देखेंगे कि वे आपकी ओर देख रहे हैं, हालाँकि वे कुछ नहीं देखते।

तफ़सीर

और (ऐ मुश्रिको!) यदि तुम अपनी मूर्तियों को, जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पूजते हो, सीधी राह की ओर बुलाओ, तो वे तुम्हारे बुलावे को नहीं सुनेंगी। और तुम उन्हें देखोगे कि वे तुम्हारी ओर तुम्हारी ही बनाई हुई आँखों से देख रही हैं, हालाँकि वे निर्जीव चीज़ें हैं, जो नहीं देखती हैं। दरअसल मुश्रिक लोग मनुष्यों या जानवरों के रूप में मूर्तियाँ बनाते थे, जिनके हाथ, पैर और आँखें होती थीं। लेकिन वे बेजान होती थीं, न उनके अंदर जीवन होता था न हरकत।