وَٱلَّذِينَ تَدۡعُونَ مِن دُونِهِۦ لَا يَسۡتَطِيعُونَ نَصۡرَكُمۡ وَلَآ أَنفُسَهُمۡ يَنصُرُونَ ١٩٧
और जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पुकारते हो, वे न तुम्हारी सहायता कर सकते हैं और न स्वयं अपनी सहायता करते हैं।
तफ़सीर
और इन मूर्तियों में से जिन्हें (ऐ मुश्रिको!) तुम पुकारते हो, वे न तुम्हारी सहायता करने में सक्षम हैं, और न ही वे स्वयं का समर्थन करने में सक्षम हैं। क्योंकि वे असहाय हैं। तो फिर तुम अल्लाह को छोड़कर उन्हें कैसे पुकारते हो?!