सूरह Al-Anfal, आयत 67

8:67

مَا كَانَ لِنَبِيٍّ أَن يَكُونَ لَهُۥٓ أَسۡرَىٰ حَتَّىٰ يُثۡخِنَ فِي ٱلۡأَرۡضِۚ تُرِيدُونَ عَرَضَ ٱلدُّنۡيَا وَٱللَّهُ يُرِيدُ ٱلۡأٓخِرَةَۗ وَٱللَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٞ ٦٧

किसी नबी के लिए उचित नहीं कि उसके पास बंदी हों, यहाँ तक कि वह धरती में (उनका) अच्छी तरह खून बहा ले। तुम संसार की सामग्री चाहते हो और अल्लाह आख़िरत (परलोक) चाहता है। और अल्लाह सबपर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।

तफ़सीर

किसी नबी के लिए उचित नहीं है कि उसके पास उन काफ़िरों में से बंदी हों, जो उससे लड़ रहे हैं, यहाँ तक कि उनका अच्छी तरह खून बहा ले; ताकि उनके दिलों में भय दाखिल हो जाए, फिर वे दोबारा युद्ध करने की हिम्मत न करें। (ऐ ईमान वालो!) तुम बद्र में दुश्मनों को बंदी बनाकर फिरौती लेना चाहते हो और अल्लाह आख़िरत चाहता है, जिसे धर्म की जीत और उसके प्रभुत्व से प्राप्त किया जा सकता है। अल्लाह अपने अस्तित्व, अपने गुणों और शक्ति में प्रभुत्वशाली है, उसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता। वह अपनी नियति और शरीयत में हिकमत वाला है।