ثُمَّ نُكِسُواْ عَلَىٰ رُءُوسِهِمۡ لَقَدۡ عَلِمۡتَ مَا هَٰٓؤُلَآءِ يَنطِقُونَ ٦٥
फिर वे अपने सिरों के बल औंधे कर दिए गए26, (और बोले :) निःसंदेह तू जानता है कि ये बोलते नहीं।
फ़ुटनोट
26 अर्थात सत्य को स्वीकार करके उससे फिर गए और अपनी ज़िद पर लौट आए।
तफ़सीर
फिर वे अपने हठ और इनकार पर लौट आए और बोले : (ऐ इबराहीम!) तुम अच्छी तरह जानते हो कि ये मूर्तियाँ बोलती नहीं हैं, तो तुम हमें उनसे पूछने का आदेश कैसे देते हो? यह बात उन्होंने अपने लिए एक तर्क के रूप में कही, लेकिन यह खुद उनके खिलाफ़ तर्क बन गई।