فَرَجَعُوٓاْ إِلَىٰٓ أَنفُسِهِمۡ فَقَالُوٓاْ إِنَّكُمۡ أَنتُمُ ٱلظَّٰلِمُونَ ٦٤
फिर उन्होंने अपने मन में विचार किया और कहने लगे : निश्चय तुम खुद ही अत्याचारी हो।
तफ़सीर
उन्होंने अपने मन में विचार और चिंतन किया, तो उनके लिए यह स्पष्ट हो गया कि उनकी मूर्तियाँ लाभ या हानि पहुँचाने की मालिक नहीं हैं। इसलिए वे अल्लाह को छोड़कर उनकी पूजा करने के कारण खुद ही ज़ालिम हैं।