सूरह Al-Ahzab, आयत 23

33:23

مِّنَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ رِجَالٞ صَدَقُواْ مَا عَٰهَدُواْ ٱللَّهَ عَلَيۡهِۖ فَمِنۡهُم مَّن قَضَىٰ نَحۡبَهُۥ وَمِنۡهُم مَّن يَنتَظِرُۖ وَمَا بَدَّلُواْ تَبۡدِيلٗا ٢٣

ईमान वालों में से कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्होंने अल्लाह से जो प्रतिज्ञा की थी, उसे सच कर दिखाया। फिर उनमें से कुछ तो अपना प्रण17 पूरा कर चुके, और उनमें से कुछ लोग (अभी) प्रतीक्षा कर रहे हैं। और उन्होंने (अपनी प्रतिज्ञा में) तनिक भी परिवर्तन नहीं किया।

फ़ुटनोट

17 अर्थात युद्ध में शहीद कर दिए गए।

तफ़सीर

ईमान वालों में से कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्होंने अल्लाह से किया हुआ वादा सच कर दिखाया। चुनाँचे उन्होंने अल्लाह के रास्ते में जिहाद में दृढ़ता और धैर्य का जो वादा किया था, उसे पूरा किया। तो उनमें से कुछ लोग मर गए या अल्लाह की राह में शहीद हो गए और कुछ लोग असके रास्ते में शहीद होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। और इन ईमान वालों ने अल्लाह से कि हुए अपने वादे को नहीं बदला, जैसा कि मुनाफ़िक़ों ने अपने वादों के साथ किया।