सूरह Al-Ahzab, आयत 24

33:24

لِّيَجۡزِيَ ٱللَّهُ ٱلصَّٰدِقِينَ بِصِدۡقِهِمۡ وَيُعَذِّبَ ٱلۡمُنَٰفِقِينَ إِن شَآءَ أَوۡ يَتُوبَ عَلَيۡهِمۡۚ إِنَّ ٱللَّهَ كَانَ غَفُورٗا رَّحِيمٗا ٢٤

ताकि अल्लाह सच्चे लोगों को उनके सच का बदला प्रदान करे, और मुनाफ़िक़ों को, यदि चाहे तो यातना दे या उनकी तौबा क़बूल कर ले। निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।

तफ़सीर

ताकि अल्लाह उन सच्चे लोगों को, जिन्होंने अल्लाह से किए हुए वादे को पूरा किया, उनकी सच्चाई और वादा निभाने का बदला दे, और प्रतिज्ञा को तोड़ने वाले मुनाफ़िक़ों को यदि चाहे तो यातना दे, इस प्रकार कि उन्हें उनके कुफ़्र से तौबा करने से पहले ही मौत दे दे, या उनकी तौबा क़बूल करते हुए उन्हें तौबा करने की तौफ़ीक़ प्रदान कर दे। और अल्लाह अपने गुनाहों से तौबा करने वाले को क्षमा करने वाला, उसपर दया करने वाला है।