وَإِذۡ قَالَت طَّآئِفَةٞ مِّنۡهُمۡ يَٰٓأَهۡلَ يَثۡرِبَ لَا مُقَامَ لَكُمۡ فَٱرۡجِعُواْۚ وَيَسۡتَـٔۡذِنُ فَرِيقٞ مِّنۡهُمُ ٱلنَّبِيَّ يَقُولُونَ إِنَّ بُيُوتَنَا عَوۡرَةٞ وَمَا هِيَ بِعَوۡرَةٍۖ إِن يُرِيدُونَ إِلَّا فِرَارٗا ١٣
और जब उनके एक गिरोह ने कहा : ऐ यसरिब9 वालो! तुम्हारे लिए ठहरने का कोई अवसर नहीं है। अतः लौट10 चलो। तथा उनमें से एक गिरोह नबी से (वापसी की) अनुमति माँगता था। वे कहते थे : हमारे घर असुरक्षित हैं। हालाँकि वे असुरक्षित नहीं हैं। वे तो केवल भागना चाहते हैं।
फ़ुटनोट
9 यह मदीने का प्राचीन नाम है।
10 अर्थात रणक्षेत्र से अपने घरों को।
तफ़सीर
और (ऐ रसूल!) उस समय को याद करें, जब मुनाफ़िक़ों के एक समूह ने मदीना के लोगों से कहा : ऐ यसरिब (इस्लाम से पहले मदीना का नाम) वालो! तुम्हारे लिए ख़ंदक़ के पास, 'सल्अ' पहाड़ी के दामन में ठहरने का कोई स्थान नहीं है। इसलिए अपने घरों को लौट चलो। और उनमें से एक समूह नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से घर वापसी की अनुमित माँग रहा था। उनका दावा था कि उनके घर दुश्मन की ज़द में हैं, जबकि मामला ऐसा नहीं है जैसा कि उन्होंने दावा किया है। बल्कि वे इस झूठे बहाने के द्वारा दुश्मन से भागना चाहते हैं।