يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ كُتِبَ عَلَيۡكُمُ ٱلصِّيَامُ كَمَا كُتِبَ عَلَى ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِكُمۡ لَعَلَّكُمۡ تَتَّقُونَ ١٨٣
ऐ ईमान वालो! तुमपर रोज़ा100 रखना फ़र्ज़ (अनिवार्य) कर दिया गया है, जैसे उन लोगों पर फ़र्ज़ (अनिवार्य) किया गया जो तुमसे पहले थे, ताकि तुम परहेज़गार बन जाओ।
फ़ुटनोट
100 रोज़ा को अरबी भाषा में "सौम" कहा जाता है, जिसका अर्थ रुकना तथा त्याग देना है। इस्लाम में रोज़ा सन् 2 हिजरी में अनिवार्य किया गया। जिसका अर्थ है प्रत्यूष (भोर) से सूर्यास्त तक रोज़े की नीयत से खाने पीन तथा संभोग आदि चीजों से रुक जाना।
तफ़सीर
ऐ अल्लाह पर ईमान लाने वालो और उसके रसूल का अनुसरण करने वालो! तुमपर तुम्हारे पालनहार की ओर से रोज़ा रखना फ़र्ज़ कर दिया गया है, जैसे तुमसे पहले समुदायों पर फ़र्ज़ किया गया था; ताकि तुम अल्लाह से डरो। अर्थात् अपने और उसके दंड के बीच अच्छे कर्मों को बचाव का साधन बना लो, और उनमें से एक महान कार्य रोज़ा रखना है।