أَلَمۡ تَرَ أَنَّ ٱللَّهَ خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ بِٱلۡحَقِّۚ إِن يَشَأۡ يُذۡهِبۡكُمۡ وَيَأۡتِ بِخَلۡقٖ جَدِيدٖ ١٩
क्या तूने नहीं देखा कि अल्लाह ने आकाशों तथा धरती की रचना सत्य के साथ की है? यदि वह चाहे, तो तुम सब को ले जाए और एक नई रचना ले आए।
तफ़सीर
(ऐ इनसान) क्या तू नहीं जानता कि अल्लाह ने आसमानों और ज़मीन को सत्य के साथ पैदा किया है। चुनाँचे उसने उन्हें व्यर्थ में नहीं बनाया। यदि वह (ऐ लोगो!) तुम्हें विनष्ट करना और तुम्हारे स्थान पर एक अन्य मख़लूक़ लाना चाहे, जो उसकी इबादत और आज्ञापालन करे, तो वह तुम्हें विनष्ट करके एक अन्य मख़लूक़ ला सकता है, जो उसकी इबादत और आज्ञापालन करने वाली हो। क्योंकि यह उसके लिए बहुत आसान काम है।