مَّثَلُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ بِرَبِّهِمۡۖ أَعۡمَٰلُهُمۡ كَرَمَادٍ ٱشۡتَدَّتۡ بِهِ ٱلرِّيحُ فِي يَوۡمٍ عَاصِفٖۖ لَّا يَقۡدِرُونَ مِمَّا كَسَبُواْ عَلَىٰ شَيۡءٖۚ ذَٰلِكَ هُوَ ٱلضَّلَٰلُ ٱلۡبَعِيدُ ١٨
उन लोगों का उदाहरण जिन्होंने अपने पालनहार के साथ कुफ़्र किया, उनके कार्य उस राख की तरह हैं, जिसपर आँधी वाले दिन में हवा बहुत प्रचंड चली। वे लोग अपने किए में से कुछ नहीं पा सकेंगे। यही (सत्य से) बहुत दूर की गुमराही है।
तफ़सीर
काफ़िर लोग जो नेकी के कार्य करते हैं, जैसे दान, उपकार और कमज़ोरों पर कृपा आदि, उनकी मिसाल उस राख की तरह है, जिस पर आँधी वाले दिन में तेज़ हवा चले और उसे पूरी शक्ति से उड़ा ले जाए और अलग-अलग स्थानों में इस तरह बिखेर दे कि उसका निशान तक बाक़ी न रहे। यही हाल काफ़िरों के अच्छे कार्यों का है, जिनपर कुफ़्र की आँधी चल चुकी है। क़ियामत के दिन काफ़िरों को उनका कोई लाभ नहीं होगा। वह कार्य जिसकी बुनियाद ईमान पर न हो, वह सत्य के मार्ग से दूर की गुमराही है।