وَلَقَدۡ ءَاتَيۡنَا مُوسَى ٱلۡكِتَٰبَ فَٱخۡتُلِفَ فِيهِۚ وَلَوۡلَا كَلِمَةٞ سَبَقَتۡ مِن رَّبِّكَ لَقُضِيَ بَيۡنَهُمۡۚ وَإِنَّهُمۡ لَفِي شَكّٖ مِّنۡهُ مُرِيبٖ ١١٠
और हमने मूसा को पुस्तक (तौरात) प्रदान की। तो उसमें विभेद किया गया। और यदि आपके पालनहार ने पहले से एक बात40 निश्चित न की होती, तो उनके बीच निर्णय कर दिया गया होता। और निःसंदेह वे41 उस (क़ुरआन) के बारे में असमंजस में डाल देनेवाले संदेह में पड़े हुए हैं।
फ़ुटनोट
40 अर्थात यह कि संसार में प्रत्येक को अपनी इच्छानुसार कर्म करने का अवसर दिया जाएगा।
41 अर्थात मिश्रणवादी क़ुरआन के विषय में।
तफ़सीर
और हमने मूसा को तौरात दी थी, फिर लोगों ने उसमें विभेद किया। कुछ लोग उसपर ईमान लाए और कुछ लोगों ने उसका इनकार किया। यदि अल्लाह का यह पूर्व निर्धारित निर्णय न होता कि वह शीघ्र ही (दुनिया में) यातना नहीं देगा, बल्कि अपनी हिकमत के तहत उसे क़ियामत तक के लिए विलंबित रखेगा, तो दुनिया ही में वह अज़ाब आ जाता, जिसके वे हक़दार हैं। यहूदियों तथा बहुदेववादियों में से काफ़िर लोग कुरआन के संबंध में संदेह में पड़े हुए हैं, जो असमंजस में डालने वाला है।