۞ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ إِنَّ كَثِيرٗا مِّنَ ٱلۡأَحۡبَارِ وَٱلرُّهۡبَانِ لَيَأۡكُلُونَ أَمۡوَٰلَ ٱلنَّاسِ بِٱلۡبَٰطِلِ وَيَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِۗ وَٱلَّذِينَ يَكۡنِزُونَ ٱلذَّهَبَ وَٱلۡفِضَّةَ وَلَا يُنفِقُونَهَا فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ فَبَشِّرۡهُم بِعَذَابٍ أَلِيمٖ ٣٤
ऐ ईमान वालो! निःसंदेह बहुत-से विद्वान तथा दरवेश निश्चित रूप से लोगों का धन अवैध तरीके से खाते हैं और अल्लाह की राह से रोकते हैं। तथा जो लोग सोना-चाँदी एकत्र करके रखते हैं और उसे अल्लाह की राह में खर्च नहीं करते, तो उन्हें दर्दनाक अज़ाब की ख़ुशख़बरी दे दो।
तफ़सीर
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसकी शरीयत का अनुसरण करने वालो! बहुत-से यहूदी विद्वान और बहुत-से ईसाई उपासक, लोगों के धनों को बिना किसी वैध अधिकार के लेते हैं। चुनाँचे वे उन्हें रिश्वत और अन्य अवैध ढंग से लेते हैं, और वे लोगों को अल्लाह के धर्म में प्रवेश करने से रोकते हैं। तथा जो लोग सोना-चाँदी जमा करके रखते हैं और अपने ऊपर अनिवार्य उसकी ज़कात नहीं देते, तो (ऐ रसूल!) आप उन्हें क़ियामत के दिन दर्दनाक यातना की सूचना दे दें, जिससे उन्हें बहुत तकलीफ़ होगी।