مُّطَاعٖ ثَمَّ أَمِينٖ ٢١
उसकी वहाँ (आसमानों में) बात मानी जाती है और बड़ा विश्वसनीय है।3
फ़ुटनोट
3 (15-21) तारों की व्यवस्था गति तथा अँधेरे के पश्चात् नियमित रूप से उजाला की शपथ इस बात की गवाही है कि क़ुरआन ज्योतिष की बकवास नहीं। बल्कि यह ईश-वाणी है। जिसको एक शक्तिशाली तथा सम्मान वाला फ़रिश्ता लेकर मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आया। और अमानतदारी से इसे पहुँचाया।
तफ़सीर
आकाश वाले उनकी बात मानते हैं, और वह जो वह़्य (प्रकाशना) पहुँचाते हैं, उसपर विश्वसनीय हैं।