وَلَا صَدِيقٍ حَمِيمٖ ١٠١
और न कोई घनिष्ट मित्र।
तफ़सीर
और न हमारा कोई सच्चा मित्र है, जो हमारा बचाव करे और हमारे लिए सिफ़ारिश करे।
وَلَا صَدِيقٍ حَمِيمٖ ١٠١
और न कोई घनिष्ट मित्र।
और न हमारा कोई सच्चा मित्र है, जो हमारा बचाव करे और हमारे लिए सिफ़ारिश करे।