सूरह Ash-Shu'ara, आयत 101

26:101

وَلَا صَدِيقٍ حَمِيمٖ ١٠١

और न कोई घनिष्ट मित्र।

तफ़सीर

और न हमारा कोई सच्चा मित्र है, जो हमारा बचाव करे और हमारे लिए सिफ़ारिश करे।