सूरह Ash-Shams, आयत 6

91:6

وَٱلۡأَرۡضِ وَمَا طَحَىٰهَا ٦

और धरती की तथा उसे बिछाने की (क़सम!)1

फ़ुटनोट

1 (1-6) इन आयतों का भावार्थ यह है कि जिस प्रकार सूर्य के विपरीत चाँद, तथा दिन के विपरीत रात है, इसी प्रकार पुण्य और पाप तथा इस संसार का प्रति एक दूसरा संसार परलोक भी है। और इन्हीं स्वभाविक लक्ष्यों से परलोक का विश्वास होता है।

तफ़सीर

और धरती की क़सम खाई है तथा उसके बिछाने व हमवार करने की क़सम खाई, ताकि लोग उसके ऊपर रह सकें।