وَمِنۡ ءَايَٰتِهِۦٓ أَن تَقُومَ ٱلسَّمَآءُ وَٱلۡأَرۡضُ بِأَمۡرِهِۦۚ ثُمَّ إِذَا دَعَاكُمۡ دَعۡوَةٗ مِّنَ ٱلۡأَرۡضِ إِذَآ أَنتُمۡ تَخۡرُجُونَ ٢٥
और उसकी निशानियों में से है कि आकाश तथा धरती उसके आदेश से स्थापित हैं। फिर जब वह तुम्हें धरती में से एक ही बार पुकारेगा, तो सहसा तुम (बाहर) निकल आओगे।
तफ़सीर
और अल्लाह की उसकी शक्ति और एकता को दर्शाने वाली निशानियों में से आकाश का बिने गिरे और धरती का बिना ध्वस्त हुए; उस महिमावान के आदेश से स्थापित होना है। फिर जब वह तुम्हें फ़रिश्ते के सूर में फूँकने के द्वारा धरती से बुलाएगा, तो अचानक तुम हिसाब और बदले के लिए अपनी क़ब्रों से निकल पड़ोगे।