۞ وَإِن تَعۡجَبۡ فَعَجَبٞ قَوۡلُهُمۡ أَءِذَا كُنَّا تُرَٰبًا أَءِنَّا لَفِي خَلۡقٖ جَدِيدٍۗ أُوْلَٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ بِرَبِّهِمۡۖ وَأُوْلَٰٓئِكَ ٱلۡأَغۡلَٰلُ فِيٓ أَعۡنَاقِهِمۡۖ وَأُوْلَٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ ٱلنَّارِۖ هُمۡ فِيهَا خَٰلِدُونَ ٥
तथा यदि आप आश्चर्य करते हैं, तो उनका यह कहना1 बुत आश्चर्यपूर्ण है कि क्या जब हम मिट्टी हो जाएँगे, तो क्या वास्तव में हम निश्चय एक नया जीवन पाएँगे। यही लोग हैं जिन्होंने अपने पालनहार के साथ कुफ़्र किया, तथा यही हैं जिनकी गर्दनों में तौक़ होंगे और यही नरक वाले हैं, वे उसमें सदैव रहने वाले हैं।
फ़ुटनोट
1 क्योंकि कि वे जानते हैं कि बीज धरती में सड़ कर मिल जाता है, फिर उससे पौधा उगता है।
तफ़सीर
(ऐ रसूल) यदि आप किसी चीज़ पर आश्चर्य करते हैं, तो आपके लिए सबसे अधिक आश्चर्य की बात उनका पुनर्जीवन का इनकार करना और इसके इनकार के तर्क के रूप में उनका यह कहना है : क्या जब हम मर जाएँगे और मिट्टी तथा सड़ी-गली हड्डियाँ हो जाएँगे, तो क्या हमें दोबारा जीवित किया जाएगा?! यही मृत्यु के बाद दोबारा जीवित किए जाने का इनकार करने वाले लोग हैं, जिन्होंने अपने पालनहार के साथ कुफ़्र किया, इसलिए मृतकों को पुनर्जीवित कर उठाने की उसकी शक्ति का इनकार कर दिया। और यही लोग हैं जिनके गले में क़ियामत के दिन आग की ज़ंजीरें डाली जाएँगी और यही दोज़ख़ वाले हैं, जो उसमें हमेशा के लिए रहने वाले हैं, न उनका विनाश होगा और न उनकी यातना ख़त्म होगी।