لِلَّذِينَ ٱسۡتَجَابُواْ لِرَبِّهِمُ ٱلۡحُسۡنَىٰۚ وَٱلَّذِينَ لَمۡ يَسۡتَجِيبُواْ لَهُۥ لَوۡ أَنَّ لَهُم مَّا فِي ٱلۡأَرۡضِ جَمِيعٗا وَمِثۡلَهُۥ مَعَهُۥ لَٱفۡتَدَوۡاْ بِهِۦٓۚ أُوْلَٰٓئِكَ لَهُمۡ سُوٓءُ ٱلۡحِسَابِ وَمَأۡوَىٰهُمۡ جَهَنَّمُۖ وَبِئۡسَ ٱلۡمِهَادُ ١٨
जिन लोगों ने अपने पालनहार की बात स्वीकार कर ली, उन्हीं के लिए भलाई है। और जिन्होंने उसकी बात स्वीकार न की, यदि उनके पास वह सब कुछ हो जो धरती में हैं और उसके साथ उतना और भी हो, तो वे अवश्य उसे (अल्लाह के दंड से) छुड़ौती में दे दें। यही लोग हैं जिनके लिए बुरा हिसाब है तथा उनका ठिकाना नरक है और वह बुरा ठिकाना है।
तफ़सीर
जिन लोगों ने अपने पालनहार की बात मान ली, जो उसने उन्हें अपने एकत्व (एकेश्वरवाद) और आज्ञापालन के लिए आमंत्रित किया, उनके लिए सबसे अच्छा बदला है और वह जन्नत है। और काफ़िर लोग जिन्होंने अपने पालनहार की तौहीद तथा आज्ञापालन के आमंत्रण को स्वीकार नहीं किया, यदि ऐसा हो जाए कि दुनिया का सारा धन उनके पास आ जाए और इसके साथ उनके पास इसके बराबर और भी धन आ जाए, तो वे अपने आपको अज़ाब से छुड़ाने के लिए वह सारा धन अवश्य खर्च कर देंगे। अल्लाह के आमंत्रण को स्वीकार न करने वाले इन लोगों से उनके सभी पापों का हिसाब लिया जाएगा। और उनका निवास जिसमें वे रहेंगे, जहन्नम है। और उनका बिस्तर तथा ठिकाना जो कि आग है, बहुत बुरा है।