وَلَئِنۡ أَصَٰبَكُمۡ فَضۡلٞ مِّنَ ٱللَّهِ لَيَقُولَنَّ كَأَن لَّمۡ تَكُنۢ بَيۡنَكُمۡ وَبَيۡنَهُۥ مَوَدَّةٞ يَٰلَيۡتَنِي كُنتُ مَعَهُمۡ فَأَفُوزَ فَوۡزًا عَظِيمٗا ٧٣
और यदि तुम्हें अल्लाह का अनुग्रह प्राप्त हो जाए, तो वह अवश्य इस तरह कहेगा मानो तुम्हारे और उसके बीच कोई मित्रता ही नहीं थी कि ऐ काश! मैं भी उनके साथ होता, तो बड़ी सफलता प्राप्त कर लेता!
तफ़सीर
और यदि तुम्हें - ऐ मुसलमानो! - विजय अथवा माले ग़नीमत के रूप में अल्लाह का अनुग्रह प्राप्त हो जाए, तो जिहाद से पीछे रहने वाला यही व्यक्ति अवश्य इस तरह कहेगा मानो वह तुममें से है ही नहीं और तुम्हारे और उसके बीच कोई प्यार और साहचर्य नहीं था कि काश! मैं भी उनके साथ इस युद्ध में शामिल होता, तो उनकी तरह मैं भी बड़ी सफलता प्राप्त कर लेता!