أَلَمۡ تَرَ إِلَى ٱلَّذِينَ أُوتُواْ نَصِيبٗا مِّنَ ٱلۡكِتَٰبِ يُؤۡمِنُونَ بِٱلۡجِبۡتِ وَٱلطَّٰغُوتِ وَيَقُولُونَ لِلَّذِينَ كَفَرُواْ هَٰٓؤُلَآءِ أَهۡدَىٰ مِنَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ سَبِيلًا ٥١
(ऐ नबी!) क्या आपने उन लोगों को नहीं देखा, जिन्हें पुस्तक का कुछ भाग दिया गया? वे मूर्तियों तथा शैतान पर ईमान (विश्वास) रखते हैं और काफ़िरों42 के बारे में कहते हैं कि ये ईमान वालों से अधिक सीधी डगर पर हैं।
फ़ुटनोट
42 अर्थात मक्का के मूर्ति के पुजारियों के बारे में। मदीना के यहूदियों की यह दशा थी कि वह सदैव मूर्ति पूजा के विरोधी रहे और उसका अपमान करते रहे। परंतु अब मुसलमानों के विरोध में उनकी प्रशंसा करते और कहते कि मूर्ति पूजकों का आचरण और स्वभाव अधिक अच्छा है।
तफ़सीर
(ऐ रसूल!) क्या आप नहीं जानते और आपको उन यहूदियों की दशा पर आश्चर्य नहीं होता, जिन्हें अल्लाह ने ज्ञान का कुछ हिस्सा दिया है, कि वे अल्लाह को छोड़कर अपने बनाए हुए माबूदों (देवताओं) पर ईमान रखते हैं और - मुश्रिकों के साथ बनाए रखने और उनकी चाटुकारिता के तौर पर - कहते हैं : ये (मुश्रिक लोग) मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथियों से अधिक हिदायत के मार्ग पर हैं?