सूरह An-Nisa, आयत 50

4:50

ٱنظُرۡ كَيۡفَ يَفۡتَرُونَ عَلَى ٱللَّهِ ٱلۡكَذِبَۖ وَكَفَىٰ بِهِۦٓ إِثۡمٗا مُّبِينًا ٥٠

देखो तो सही, वे लोग कैसे अल्लाह पर मिथ्या आरोप लगा रहे41 हैं! और यह खुला पाप होने के लिए पर्याप्त है।

फ़ुटनोट

41 अर्थात अल्लाह का नियम तो यह है कि पवित्रता, ईमान तथा सत्कर्म पर निर्भर है, और ये कहते हैं कि यहूदिय्यत पर है।

तफ़सीर

(ऐ रसूल!) देखिए तो सही कि वे लोग स्वयं की प्रशंसा करके कैसे अल्लाह पर मिथ्या आरोप लगा रहे हैं! और उनकी गुमराही को स्पष्ट करने के लिए यही गुनाह काफ़ी है।