فَأَمَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ فَيُوَفِّيهِمۡ أُجُورَهُمۡ وَيَزِيدُهُم مِّن فَضۡلِهِۦۖ وَأَمَّا ٱلَّذِينَ ٱسۡتَنكَفُواْ وَٱسۡتَكۡبَرُواْ فَيُعَذِّبُهُمۡ عَذَابًا أَلِيمٗا وَلَا يَجِدُونَ لَهُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ وَلِيّٗا وَلَا نَصِيرٗا ١٧٣
फिर जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, तो वह उन्हें उनका भरपूर बदला देगा और उन्हें अपने अनुग्रह से अधिक108 भी देगा। रहे वे लोग जिन्होंने (अल्लाह की इबादत को) तिरस्कार समझा और अभिमान किया, तो वह उन्हें दर्दनाक यातना देगा। तथा वे अपने लिए अल्लाह के सिवा न कोई मित्र पाएँगे और न कोई सहायक।
फ़ुटनोट
108 यहाँ "अधिक" से अभिप्राय स्वर्ग में अल्लाह का दर्शन है। (सह़ीह मुस्लिम :181, तिर्मिज़ी : 2552)
तफ़सीर
जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और उसके रसूलों को सच्चा माना तथा विशुद्ध रूप से अल्लाह के लिए, उसके बताए हुए तरीक़े के अनुसार अच्छे कार्य किए, तो अल्लाह उन्हें उनके कर्मों का प्रतिफल बिना कम किए देगा, तथा अपने अनुग्रह और उपकार से उन्हें उससे अधिक भी देगा। परंतु जिन लोगों ने अल्लाह की इबादत और उसकी आज्ञाकारिता से उपेक्षा किया तथा अहंकार करते हुए अपने आपको उससे ऊँचा समझा, तो वह उन्हें दर्दनाक यातना देगा। तथा वे अल्लाह के सिवा किसी को नहीं पाएँगे, जो उनका संरक्षक बनकर उन्हें लाभ पहुँचाए और मददगार बनकर उन्हें नुक़सान से बचा सके।