۞ إِنَّ قَٰرُونَ كَانَ مِن قَوۡمِ مُوسَىٰ فَبَغَىٰ عَلَيۡهِمۡۖ وَءَاتَيۡنَٰهُ مِنَ ٱلۡكُنُوزِ مَآ إِنَّ مَفَاتِحَهُۥ لَتَنُوٓأُ بِٱلۡعُصۡبَةِ أُوْلِي ٱلۡقُوَّةِ إِذۡ قَالَ لَهُۥ قَوۡمُهُۥ لَا تَفۡرَحۡۖ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُحِبُّ ٱلۡفَرِحِينَ ٧٦
निःसंदेह क़ारून26 मूसा की जाति में से था। फिर उसने उनपर सरकशी की और हमने उसे इतने ख़ज़ाने दिए कि निःसंदेह उनकी कुंजियाँ एक बलशाली गिरोह पर भारी पड़ती थीं। जब उसकी जाति ने उससे कहा : मत इतरा। निःसंदेह अल्लाह इतराने वालों से प्रेम नहीं करता।
फ़ुटनोट
26 यहाँ से धन के गर्व तथा उसके दुष्परिणाम का एक उदाहरण दिया जा रहा है कि क़ारून, मूसा (अलैहिस्सलाम) के युग का एक धनी व्यक्ति था।
तफ़सीर
निःसंदेह क़ारून मूसा अलैहिस्सलाम की जाति में से था। फिर उसने उनके विरुद्ध सरकशी दिखाई। हमने उसे धनों के इतने ख़ज़ाने दिए थे कि उसके ख़ज़ानों की चाबियाँ उठाना एक बलशाली दल पर भारी पड़ता था। जब उसकी जाति के लोगों ने उससे कहा : तू खुशी से मत इतरा, निश्चय अल्लाह खुशी से इतराने वालों से प्रेम नहीं करता। बल्कि उनसे नफरत करता है और उन्हें इसके लिए यातना देता है।