وَٱبۡتَغِ فِيمَآ ءَاتَىٰكَ ٱللَّهُ ٱلدَّارَ ٱلۡأٓخِرَةَۖ وَلَا تَنسَ نَصِيبَكَ مِنَ ٱلدُّنۡيَاۖ وَأَحۡسِن كَمَآ أَحۡسَنَ ٱللَّهُ إِلَيۡكَۖ وَلَا تَبۡغِ ٱلۡفَسَادَ فِي ٱلۡأَرۡضِۖ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُحِبُّ ٱلۡمُفۡسِدِينَ ٧٧
तथा जो कुछ अल्लाह ने तुझे दिया है, उसमें आख़िरत का घर तलाश कर, और दुनिया से अपना हिस्सा मत भूल और उपकार कर, जैसे अल्लाह ने तुझपर उपकार किया है, तथा धरती में बिगाड़ की तलाश मत कर। निःसंदेह अल्लाह बिगाड़ पैदा करने वालों से प्रेम नहीं करता।
तफ़सीर
और अल्लाह ने तुझे जो धन-संपत्ति दी है, उसे पुण्य के कार्यों में खर्च करके आख़िरत का सवाब तलब कर, तथा बिना फ़िज़ूलखर्ची और अभिमान के खाने, पीने, कपड़े और अन्य नेमतों से अपना हिस्सा मत भूल। तथा अपने पालनहार के साथ तथा उसके बंदों के साथ अच्छा व्यवहार कर, जैसे अल्लाह पाक ने तेरा भला किया है। तथा पाप करके और आज्ञाकारिता छोड़कर धरती में बिगाड़ की तलाश न कर। निःसंदेह अल्लाह ऐसा करके धरती में बिगाड़ करने वालों से प्रेम नहीं करता, बल्कि उनसे नफरत करता है।