सूरह Al-Qasas, आयत 48

28:48

فَلَمَّا جَآءَهُمُ ٱلۡحَقُّ مِنۡ عِندِنَا قَالُواْ لَوۡلَآ أُوتِيَ مِثۡلَ مَآ أُوتِيَ مُوسَىٰٓۚ أَوَلَمۡ يَكۡفُرُواْ بِمَآ أُوتِيَ مُوسَىٰ مِن قَبۡلُۖ قَالُواْ سِحۡرَانِ تَظَٰهَرَا وَقَالُوٓاْ إِنَّا بِكُلّٖ كَٰفِرُونَ ٤٨

फिर जब उनके पास हमारी ओर से सत्य आ गया, तो उन्होंने कहा : उसे उस जैसी चीज़ें क्यों न दी गईं, जो मूसा को दी गईं? तो क्या उन्होंने इससे पहले उन चीज़ों का इनकार नहीं किया जो मूसा को दी गई थीं? उन्होंने कहा : ये दोनों13 (सर्वथा) जादू हैं, जो एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं, और कहने लगे : हम तो इन सब का इनकार करने वाले हैं।

फ़ुटनोट

13 अर्थात तौरात और क़ुरआन।

तफ़सीर

जब मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम क़ुरैश के पास अपने रब का संदेश लेकर आए, तो क़ुरैश ने आपके विषय में यहूदियों से पूछा। यहूदियों ने उन्हें यह तर्क सुझाया, तो उन्होंने कहा : मुहम्मद को मूसा की तरह ऐसी निशानियाँ क्यों न दी गईं, जो उनके रसूल होने को प्रमाणित करतीं; जैसे हाथ का चमकना और लाठी। (ऐ रसूल!) आप उन्हें उत्तर देते हुए कह दें : क्या यहूदियों ने उन निशानियों का इनकार नहीं किया जो मूसा को दी गई थीं? तथा उन्होंने तौरात और क़ुरआन दोनों के बारे में कहा : ये दोनों जादू हैं, जो एक-दूसरे का समर्थन करते हैं। तथा उन्होंने कहा : हम क़ुरआन तथा तौरात में से हर एक का इनकार करते हैं।