يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ إِذَا جَآءَكُمُ ٱلۡمُؤۡمِنَٰتُ مُهَٰجِرَٰتٖ فَٱمۡتَحِنُوهُنَّۖ ٱللَّهُ أَعۡلَمُ بِإِيمَٰنِهِنَّۖ فَإِنۡ عَلِمۡتُمُوهُنَّ مُؤۡمِنَٰتٖ فَلَا تَرۡجِعُوهُنَّ إِلَى ٱلۡكُفَّارِۖ لَا هُنَّ حِلّٞ لَّهُمۡ وَلَا هُمۡ يَحِلُّونَ لَهُنَّۖ وَءَاتُوهُم مَّآ أَنفَقُواْۚ وَلَا جُنَاحَ عَلَيۡكُمۡ أَن تَنكِحُوهُنَّ إِذَآ ءَاتَيۡتُمُوهُنَّ أُجُورَهُنَّۚ وَلَا تُمۡسِكُواْ بِعِصَمِ ٱلۡكَوَافِرِ وَسۡـَٔلُواْ مَآ أَنفَقۡتُمۡ وَلۡيَسۡـَٔلُواْ مَآ أَنفَقُواْۚ ذَٰلِكُمۡ حُكۡمُ ٱللَّهِ يَحۡكُمُ بَيۡنَكُمۡۖ وَٱللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٞ ١٠
ऐ ईमान वालो! जब तुम्हारे पास ईमान वाली स्त्रियाँ हिजरत करके आएँ, तो उन्हें जाँच लिया करो। अल्लाह उनके ईमान को ज़्यादा जानने वाला है। फिर यदि वे तुम्हें ईमान वाली मालूम हों, तो उन्हें काफ़िरों की ओर वापस न करो।6 न ये स्त्रियाँ उन (काफ़िरों) के लिए हलाल हैं और न वे (काफ़िर) इनके लिए हलाल7 होंगे। और उन काफ़िरों ने जो खर्च किया है, वह उन्हें दे दो। तथा तुमपर कोई दोष नहीं है कि उनसे विवाह कर लो, जब उन्हें उनका महर दे दो। तथा तुम काफ़िर स्त्रियों के सतीत्व को रोक कर न रखो और जो तुमने ख़र्च किया है वह माँग लो। और वे (काफ़िर) भी माँग लें, जो उन्होंने खर्च किया है। यह अल्लाह का फैसला है। वह तुम्हारे बीच फैसला करता है। तथा अल्लाह सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
फ़ुटनोट
6 इस आयत में यह आदेश दिया जा रहा है कि जो स्त्री ईमान ला कर मदीना हिजरत करके आ जाए, उसे काफ़िरों को वापस न करो। यदि वह काफ़िर की पत्नी रही है, तो उसके पति को जो स्त्री उपहार (महर) उसने दिया हो, उसे दे दो। और उनसे विवाह कर लो। और अपने विवाह का महर भी उस स्त्री को दो। ऐसे ही जो काफ़िर स्त्री किसी मुसलमान के विवाह में हो अब उसका विवाह उसके साथ अवैध है। इस लिए वह मक्का जा कर किसी काफ़िर से विवाह करे, तो उसके पति से जो स्त्री उपहार तुमने उसे दिया है, माँग लो।
7 अर्थात अब मुसलमान स्त्री का विवाह काफ़िर के साथ, तथा काफ़िर स्त्री का मुसलमान के साथ अवैध (ह़राम) कर दिया गया है।
तफ़सीर
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! जब तुम्हारे पास मोमिन स्त्रियाँ कुफ़्र की धरती से इस्लाम की धरती की ओर हिजरत करके आ जाएँ, तो उन्हें जाँच लिया करो कि उनका ईमान सच्चा है या नहीं। अल्लाह उनके ईमान को अधिक जानता है। उनके दिलों में जो कुछ भी है उससे छिपा नहीं है। अगर परीक्षण के बाद उनकी सच्चाई ज़ाहिर हो जाए और तुम जान लो कि वे मोमिन हैं, तो उन्हें उनके काफ़िर पतियों की ओर न लौटाओ। मोमिन स्त्रियों के लिए वैध नहीं है कि काफ़िरों से निकाह करें तथा काफ़िरों के लिए वैध नहीं है कि मोमिन स्त्रियों से निकाह करें। तथा उनके (काफ़िर) पतियों को वह महर दे दो, जो उन्होंने अपनी स्त्रियों पर खर्च किया था। और (ऐ ईमान वालो!) तुमपर कोई गुनाह नहीं है कि उनकी इद्दत गुज़र जाने के बाद उनसे निकाह कर लो, जब तुम उन्हें उनका महर दे दो। और जिसकी पत्नी काफ़िर हो या इस्लाम से फिर गई हो, तो वह उसे अपने पास न रखे। क्योंकि उसके कुफ़्र के कारण उन दोनों का निकाह बाधित हो गया। और काफ़िरों से अपनी इस्लाम से फिर जाने वाली पत्नियों पर खर्च किया हुआ महर माँग लो, तथा वे भी अपनी इस्लाम ग्रहण करने वाली स्त्रियों पर खर्च किया हुआ महर माँग लें। यह (तुम्हारी तथा उनकी ओर से महर की वापसी) अल्लाह का निर्णय है। वह तुम्हारे बीच जो चाहता है, निर्णय करता है। और अल्लाह अपने बंदों की स्थितियों और उनके कार्यों से खूब अवगत है। उनमें से कोई भी चीज़ उससे छिपी नहीं है। वह अपने बंदों के लिए जो नियम बनाता है, उसमें हिकमत वाला है।