إِنَّمَا يَنۡهَىٰكُمُ ٱللَّهُ عَنِ ٱلَّذِينَ قَٰتَلُوكُمۡ فِي ٱلدِّينِ وَأَخۡرَجُوكُم مِّن دِيَٰرِكُمۡ وَظَٰهَرُواْ عَلَىٰٓ إِخۡرَاجِكُمۡ أَن تَوَلَّوۡهُمۡۚ وَمَن يَتَوَلَّهُمۡ فَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلظَّٰلِمُونَ ٩
अल्लाह तो तुम्हें केवल उन लोगों से मैत्री रखने से रोकता है, जिन्होंने तुमसे धर्म के विषय में युद्ध किया तथा तुम्हें तुम्हारे घरों से निकाला और तुम्हें निकालने में एक-दूसरे की सहायता की। और जो उनसे मैत्री करेगा, तो वही लोग अत्याचारी हैं।
तफ़सीर
अल्लाह केवल तुम्हें उन लोगों से मना करता है, जिन्होंने तुमसे तुम्हारे ईमान के कारण युद्ध किया, तुम्हें तुम्हारे घरों से निकाल दिया और तुम्हें बाहर निकालने में सहयोग किया; वह तुम्हें उनसे दोस्ती रखने से रोकता है। और तुममें से जो व्यक्ति उनसे दोस्ती करेगा, तो वही लोग अल्लाह के आदेश के उल्लंघन के कारण स्वयं को विनाश में डालकर अपने आप पर अत्याचार करने वाले हैं।