وَٱلَّذِينَ يُظَٰهِرُونَ مِن نِّسَآئِهِمۡ ثُمَّ يَعُودُونَ لِمَا قَالُواْ فَتَحۡرِيرُ رَقَبَةٖ مِّن قَبۡلِ أَن يَتَمَآسَّاۚ ذَٰلِكُمۡ تُوعَظُونَ بِهِۦۚ وَٱللَّهُ بِمَا تَعۡمَلُونَ خَبِيرٞ ٣
और जो लोग अपनी पत्नियों से ज़िहार कर लेते हैं, फिर अपनी कही हुई बात वापस लेना चाहते हैं, तो (उसका कफ़्फ़ारा यह है कि उन्हें) एक-दूसरे को हाथ लगाने2 से पहले एक दास मुक्त करना है। यह है वह (हुक्म) जिसकी तुम्हें शिक्षा दी जाती है और अल्लाह उससे जो तुम करते हो, भली-भाँति अवगत है।
फ़ुटनोट
2 हाथ लगाने का अर्थ संभोग करना है। अर्थात संभोग से पहले प्रायश्चित चुका दे।
तफ़सीर
जो लोग यह घृणित बात कहते हैं, फिर उन स्त्रियों के साथ संभोग करना चाहते हैं, जिनसे उन्होंने ज़िहार किया था, तो उनके लिए अनिवार्य है कि उनके साथ संभोग करने से पहले 'कफ़्फ़ारा' के तौर पर एक दास मुक्त करें। यह उक्त आदेश तुम्हें 'ज़िहार' से बाज़ रखने के लिए दिया जा रहा है। और अल्लाह तुम्हारे कार्यों से पूरी तरह अवगत है। उससे तुम्हारे कार्यों में से कुछ भी छिपा नहीं है।