لَّا تَجِدُ قَوۡمٗا يُؤۡمِنُونَ بِٱللَّهِ وَٱلۡيَوۡمِ ٱلۡأٓخِرِ يُوَآدُّونَ مَنۡ حَآدَّ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ وَلَوۡ كَانُوٓاْ ءَابَآءَهُمۡ أَوۡ أَبۡنَآءَهُمۡ أَوۡ إِخۡوَٰنَهُمۡ أَوۡ عَشِيرَتَهُمۡۚ أُوْلَٰٓئِكَ كَتَبَ فِي قُلُوبِهِمُ ٱلۡإِيمَٰنَ وَأَيَّدَهُم بِرُوحٖ مِّنۡهُۖ وَيُدۡخِلُهُمۡ جَنَّٰتٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَاۚ رَضِيَ ٱللَّهُ عَنۡهُمۡ وَرَضُواْ عَنۡهُۚ أُوْلَٰٓئِكَ حِزۡبُ ٱللَّهِۚ أَلَآ إِنَّ حِزۡبَ ٱللَّهِ هُمُ ٱلۡمُفۡلِحُونَ ٢٢
आप उन लोगों को जो अल्लाह तथा अंतिम दिवस पर ईमान रखते हैं, ऐसा नहीं पाएँगे कि वे उन लोगों से दोस्ती रखते हों, जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल का विरोध किया, चाहे वे उनके पिता या उनके पुत्र या उनके भाई या उनके परिजन14 हों। वही लोग हैं, जिनके दिलों में उसने ईमान लिख दिया है और अपनी ओर से एक आत्मा के साथ उन्हें शक्ति प्रदान की है। तथा उन्हें ऐसी जन्नतों में दाख़िल करेगा, जिनके नीचे से नहरें बहती होंगी, वे उनके अंदर हमेशा रहेंगे। अल्लाह उनसे प्रसन्न हो गया तथा वे उससे प्रसन्न हो गए। ये लोग अल्लाह का दल हैं। सुन लो, निःसंदेह अल्लाह का दल ही सफल होने वाला है।
फ़ुटनोट
14 इस आयत में इस बात का वर्णन किया गया है कि ईमान, और काफ़िर जो इस्लाम और मुसलमानों के जानी दुश्मन हैं उनसे सच्ची मैत्री करना एकत्र नहीं हो सकते। अतः जो इस्लाम और इस्लाम के विरोधियों से एकसाथ सच्चे संबंध रखते हैं, उनका ईमान सत्य नहीं है।
तफ़सीर
आप (ऐ नबी) उन लोगों को जो अल्लाह एवं क़ियामत के दिन पर ईमान रखते हैं, ऐसा नहीं पाएँगे कि वे उन लोगों से प्रेम करते और मित्रता रखते हों, जो अल्लाह और उसके रसूल से दुश्मनी रखते हैं, यद्यपि ये अल्लाह और उसके रसूल के दुश्मन उनके पिता, या उनके पुत्र, या उनके भाई, या उनके क़बीले वाले ही क्यों न हों, जिनसे वे संबंधित होते हैं। क्योंकि ईमान अल्लाह और उसके रसूल के दुश्मनों से मित्रता रखने से रोकता है, और क्योंकि ईमान का बंधन सभी बंधनों से सर्वोपरि है। अतः, टकराव के समय ईमान के बंधन को प्राथमिकता दी जाएगी। जो लोग अल्लाह और उसके रसूल से दुश्मनी रखने वालों से मित्रता नहीं रखते - भले ही वे इनके रिश्तेदार हों - , यही वे लोग हैं, जिनके दिलों में अल्लाह ने ईमान को जमा दिया है, इसलिए वह परिवर्तित नहीं होता। तथा उन्हें अपने प्रमाण और प्रकाश के साथ मज़बूत कर दिया है। और उन्हें क़ियामत के दिन सदैव रहने वाली जन्नतों में दाखिल करेगा, जिनके महलों और पेड़ों के नीचे से नहरे बहती होंगी। वे हमेशा के लिए वहीं रहेंगे। उनकी नेमतें उनसे बाधित नहीं होंगी और न ही वे (स्वयं) उससे नाश होंगे। अल्लाह उनसे इस तरह प्रसन्न हो गया कि उसके बाद कभी भी नाराज़ नहीं होगा। तथा वे भी अल्लाह से प्रसन्न हो गए, क्योंकि उसने उन्हें ऐसी नेमतें प्रदान कीं, जो कभी ख़त्म नहीं होंगी, जिनमें अल्लाह महिमावान् को देखना भी शामिल है। उक्त विशेषताओं से विशिष्ट लोग ही अल्लाह की सेना हैं, जो अल्लाह के आदेशों का पालन करते हैं और उसके निषेधों से दूर रहते हैं। सुन लो, निश्चय अल्लाह के सैनिक ही दुनिया और आख़िरत में अपनी अपेक्षित चीज़ों को पाने में, तथा अपनी घृणित व भयावह चीज़ों से बचने में सफल होने वाले हैं।