فَوَيۡلٞ لِّلۡمُصَلِّينَ ٤
तो विनाश है उन नमाज़ियों के लिए,2
फ़ुटनोट
2 इन आयतों में उन मुनाफ़िक़ों की दशा का वर्णन किया गया है, जो ऊपर से मुसलमान हैं परंतु उनके दिलों में परलोक और प्रतिकार का विश्वास नहीं है। इन दोनों प्रकारों के आचरण और स्वभाव को बयान करने से अभिप्राय यह बताना है कि इनसान में सदाचार की भावना परलोक पर विश्वास के बिना उत्पन्न नहीं हो सकती। और इस्लाम परलोक का सह़ीह विश्वास देकर इनसानों में अनाथों और ग़रीबों की सहायता की भावना पैदा करता है और उसे उदार तथा परोपकारी बनाता है।
तफ़सीर
5-6 - तो उन नमाज़ियों के लिए विनाश और यातना है, जो अपनी नमाज़ से लापरवाह हैं, वे उसकी परवाह नहीं करते हैं यहाँ तक कि उसका समय समाप्त हो जाता है।