لَقَدۡ أَخَذۡنَا مِيثَٰقَ بَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ وَأَرۡسَلۡنَآ إِلَيۡهِمۡ رُسُلٗاۖ كُلَّمَا جَآءَهُمۡ رَسُولُۢ بِمَا لَا تَهۡوَىٰٓ أَنفُسُهُمۡ فَرِيقٗا كَذَّبُواْ وَفَرِيقٗا يَقۡتُلُونَ ٧٠
निःसंदेह हमने बनी इसराईल से दृढ़ वचन लिया तथा उनकी ओर कई रसूल भेजे। जब कभी कोई रसूल उनके पास वह चीज़ लेकर आया, जिसे उनके दिल नहीं चाहते थे, तो उन्होंने एक गिरोह को झुठला दिया तथा एक गिरोह को क़त्ल करते रहे।
तफ़सीर
हमने बनी इसराईल से सुनने और मानने का दृढ़ वचन लिया, और हमने उनकी ओर रसूल भेजे ताकि उन्हें अल्लाह की शरीयत (नियम) पहुँचाएँ। परंतु उन्होंने उस वचन को तोड़ दिया जो उनसे लिया गया था, तथा उन्होंने अपनी इच्छाओं के पीछे चलते हुए उस चीज़ से उपेक्षा की जो उनके रसूल उनके पास लेकर आए थे, तथा उनमें से कुछ को झुठला दिया तथा कुछ को क़त्ल कर दिया।