وَإِذَا جَآءُوكُمۡ قَالُوٓاْ ءَامَنَّا وَقَد دَّخَلُواْ بِٱلۡكُفۡرِ وَهُمۡ قَدۡ خَرَجُواْ بِهِۦۚ وَٱللَّهُ أَعۡلَمُ بِمَا كَانُواْ يَكۡتُمُونَ ٦١
और जब वे37 तुम्हारे पास आते हैं, तो कहते हैं कि हम ईमान लाए, हालाँकि निश्चय वे कुफ़्र के साथ प्रवेश किए और निश्चय उसी के साथ वे निकल गए। तथा अल्लाह अधिक जानने वाला है, जो वे छिपाते थे।
फ़ुटनोट
37 इसमें मुनाफ़िक़ों का दुराचार बताया गया है।
तफ़सीर
(ऐ ईमान वालो!) जब उनमें से मुनाफ़िक़ लोग तुम्हारे पास आते हैं, तो वे अपने निफ़ाक़ के कारण तुम्हारे सामने ईमान को ज़ाहिर करते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि वे प्रवेश करते और निकलते समय कुफ़्र में लिप्त होते हैं, उससे अलग नहीं होते। तथा अल्लाह उस कुफ़्र को अच्छी तरह जानता है जो वे अपने दिलों में छिपाते हैं, यदि वे तुम्हारे सामने ईमान को ज़ाहिर करते हैं और वह शीघ्र ही उन्हें उसका प्रतिफल देगा।