सूरह Al-Ma'idah, आयत 55

5:55

إِنَّمَا وَلِيُّكُمُ ٱللَّهُ وَرَسُولُهُۥ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱلَّذِينَ يُقِيمُونَ ٱلصَّلَوٰةَ وَيُؤۡتُونَ ٱلزَّكَوٰةَ وَهُمۡ رَٰكِعُونَ ٥٥

तुम्हारे मित्र तो केवल अल्लाह और उसका रसूल तथा वे लोग हैं जो ईमान लाए, जो नमाज़ क़ायम करते और ज़कात देते हैं और वे (अल्लाह के आगे) झुकने वाले हैं।

तफ़सीर

यहूदी, ईसाई तथा अन्य काफिर तुम्हारे मित्र नहीं हैं, बल्कि तुम्हारे मित्र और सहायक केवल अल्लाह, उसके रसूल और वे ईमान वाले हैं, जो पूरी तरह से नमाज़ अदा करते हैं, और अपने धन की ज़कात देते हैं तथा वे अल्लाह के प्रति विनीत और विनम्र होते हैं।