सूरह Al-Ma'idah, आयत 39

5:39

فَمَن تَابَ مِنۢ بَعۡدِ ظُلۡمِهِۦ وَأَصۡلَحَ فَإِنَّ ٱللَّهَ يَتُوبُ عَلَيۡهِۚ إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٌ ٣٩

फिर जो व्यक्ति अपने अत्याचार (चोरी) के बाद तौबा कर ले और सुधार करे, तो निश्चय अल्लाह उसकी तौबा स्वीकार करेगा।29 निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।

फ़ुटनोट

29 अर्थात उसे परलोक में दंड नहीं देगा, परंतु न्यायालय उसे चोरी सिद्ध होने पर चोरी का दंड देगा। (तफसीर क़ुर्तुबी)

तफ़सीर

जो व्यक्ति चोरी से अल्लाह के समक्ष तौबा कर ले और अपने कार्य को सुधार ले, तो अल्लाह अपने अनुग्रह से उसकी तौबा स्वीकार कर लेगा; क्योंकि अल्लाह अपने बंदों में से तौबा करने वालों के पापों को क्षमा करने वाला, उनपर दया करने वाला है। लेकिन अगर मामला शासकों के पास पहुँच गया है, तो तौबा करने से उनका शरई ह़द समाप्त नहीं होगा।