وَمَا لِأَحَدٍ عِندَهُۥ مِن نِّعۡمَةٖ تُجۡزَىٰٓ ١٩
और उसपर किसी का कोई उपकार नहीं है, जिसका बदला चुकाया जाए।
तफ़सीर
वह अपना माल इसलिए नहीं खर्च करता कि उसपर किसी का उपकार है, जिसे वह चुकाना चाहता है।
وَمَا لِأَحَدٍ عِندَهُۥ مِن نِّعۡمَةٖ تُجۡزَىٰٓ ١٩
और उसपर किसी का कोई उपकार नहीं है, जिसका बदला चुकाया जाए।
वह अपना माल इसलिए नहीं खर्च करता कि उसपर किसी का उपकार है, जिसे वह चुकाना चाहता है।