۞ مَّآ أَشۡهَدتُّهُمۡ خَلۡقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَلَا خَلۡقَ أَنفُسِهِمۡ وَمَا كُنتُ مُتَّخِذَ ٱلۡمُضِلِّينَ عَضُدٗا ٥١
मैंने उन्हें न आकाशों तथा धरती के पैदा करने में उपस्थित किया और न स्वयं उनके पैदा करने में, और न ही मैं पथभ्रष्ट करने वालों को सहायक20 बनाने वाला था।
फ़ुटनोट
20 भावार्थ यह है कि विश्व की उत्पत्ति के समय इनका अस्तित्व न था। यह तो बाद में उत्पन्न किए गए हैं। उनकी उत्पत्ति में भी उनसे कोई सहायता नहीं ली गई, तो फिर ये अल्लाह के बराबर कैसे हो गए।
तफ़सीर
ये लोग जिन्हें तुमने मुझे छोड़कर अपना सहायक व मित्र बना रखा है, तुम्हारे ही जैसे बंदे हैं। मैंने आकाशों तथा धरती को पैदा करते समय उन्हें उपस्थित नहीं किया था। बल्कि उस समय उनका अस्तित्व ही नहीं था। और न ही मैंने उनमें से कुछ को दूसरों के पैदा करने में उपस्थित किया था। क्योंकि मैं सृजन और प्रबंधन में अकेला हूँ। और मैं मानव जाति और जिन्न के शैतानों में से गुमराह करने वालों को अपना सहायक बनाने वाला न था। क्योंकि मैं सहायकों से बेनियाज़ हूँ।