सूरह Al-Kahf, आयत 21

18:21

وَكَذَٰلِكَ أَعۡثَرۡنَا عَلَيۡهِمۡ لِيَعۡلَمُوٓاْ أَنَّ وَعۡدَ ٱللَّهِ حَقّٞ وَأَنَّ ٱلسَّاعَةَ لَا رَيۡبَ فِيهَآ إِذۡ يَتَنَٰزَعُونَ بَيۡنَهُمۡ أَمۡرَهُمۡۖ فَقَالُواْ ٱبۡنُواْ عَلَيۡهِم بُنۡيَٰنٗاۖ رَّبُّهُمۡ أَعۡلَمُ بِهِمۡۚ قَالَ ٱلَّذِينَ غَلَبُواْ عَلَىٰٓ أَمۡرِهِمۡ لَنَتَّخِذَنَّ عَلَيۡهِم مَّسۡجِدٗا ٢١

और इसी प्रकार, हमने (लोगों को) उनसे अवगत करा दिया, ताकि वे जान लें कि अल्लाह का वादा सत्य है, और क़ियामत (के आने) में कोई संदेह6 नहीं। (याद करो) जब वे7 (उनके विषय में) आपस में विवाद करने लगे। कुछ लोगों ने कहा : उनपर कोई भवन निर्माण करा दो, उनका पालनहार उनके बारे में अधिक जानता है। जो लोग उनके मामले में प्रभावी रहे, उन्होंने कहा : हम तो उन (की गुफा के स्थान) पर अवश्य एक मस्जिद बनाएँगे।

फ़ुटनोट

6 जिसके आने पर सबको उनके कर्मों का फल दिया जाएगा।

7 अर्थात जब पुराने सिक्के और भाषा के कारण उनका भेद खुल गया और वहाँ के लोगों को उनकी कथा का ज्ञान हो गया, तो फिर वे अपनी गुफा ही में मर गए। और उनके विषय में यह विवाद उत्पन्न हो गया। यहाँ यह ज्ञातव्य है कि इस्लाम में समाधियों पर मस्जिद बनाना, और उसमें नमाज़ पढ़ना तथा उसपर कोई निर्माण करना अवैध है। जिसका पूरा विवरण ह़दीसों में मिलेगा। (सह़ीह़ बुख़ारी : 435, मुस्लिम : 531-32)

तफ़सीर

और जिस प्रकार हमने उनके साथ हमारी शक्ति को दर्शाने वाले अद्भुत कार्य किए, जैसे बहुत वर्षों तक उन्हें नींद के आगोश में रखना और उसके बाद उन्हें जगाना, उसी प्रकार हमने उनके शहर के लोगों को उनसे अवगत कर दिया, ताकि उनके शहर के लोगों को पता चल जाए कि अल्लाह का ईमान वालों की मदद करने और मरने के बाद दोबारा जीवित करने का वादा सच्चा है और यह कि क़ियामत आने वाली है, उसके आने में कोई संदेह नहीं है। फिर जब गुफा वालों का मामला प्रकाश में आ गया और उनकी मृत्यु हो गई, तो उनसे अवगत होने वालों के बीच इस बारे में मतभेद हो गया कि : वे उनके संबंध में क्या करें? उनमें से एक समूह ने कहा : उनकी गुफा के द्वार पर एक भवन बना दो, जिससे वे छिपे तथा सुरक्षित रहें। उनका पालनहार उनकी स्थिति के बारे में सबसे अधिक जानता है। क्योंकि उनकी स्थिति की अपेक्षा यह है कि उन्हें अल्लाह के यहाँ विशेष स्थान प्राप्त है। तथा प्रभावशाली लोगों ने, जिनके पास ज्ञान तथा सही दावत नहीं थी, कहा : हम उनके इस स्थान पर उनके सम्मान हेतु तथा उनके स्थान की यादगार के तौर पर एक मस्जिद बनाएँगे।